स्वास्थ्यसोते समय शर्मनाक पलों को दोहराने का मनोविज्ञान
डॉ. चंदनी टुगनैत, मनोचिकित्सक और Gateway of Healing की संस्थापक, बताती हैं कि सोते समय शर्मनाक पलों का दिमाग में बार-बार आना क्यों होता है। ये यादें सामाजिक अलार्म की तरह होती हैं, जो समूह में स्वीकार्यता के लिए पुराने सामाजिक गलती को खतरा मानती हैं। दिमाग इन्हें दोहराकर पुनरावृत्ति से बचने की तैयारी करता है। रात में थकान से तर्कशक्ति कमजोर हो जाती है, जिससे ये यादें अधिक स्पष्ट हो जाती हैं।
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