स्वास्थ्यफ़ोटो: HT Healthफेफड़ों के विशेषज्ञ ने बताया स्क्रीन टाइम से सांस लेने पर प्रभाव
नारायणा अस्पताल, हावड़ा के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. संदीप जैन ने बताया कि लंबे समय तक स्क्रीन देखने से सीधे नहीं, बल्कि खराब मुद्रा और निष्क्रियता के कारण सांस लेने पर असर पड़ता है। इससे श्वास छोटी और कम गहरी हो जाती है, जिसे शैलो ब्रीदिंग कहते हैं। डिवाइस उपयोग के दौरान मुद्रा सांस लेने के तरीके को बदल सकती है।
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