भीलवाड़ा के गांव में रावण का दहन नहीं, बल्कि वध होता है
भीलवाड़ा के शाहपुरा क्षेत्र के रोपा गांव में दशहरा पर रावण की प्रतिमा जलाने की बजाय प्रतीकात्मक रूप से वध किया जाता है। लगभग 100 साल पुरानी 10 फुट ऊंची सीमेंट की रावण की मूर्ति हर साल रंगी जाती है। दशहरा के दिन बच्चे धनुष-बाण से रावण वध का अभिनय करते हैं, जिससे गांव को 'रावण का गांव' कहा जाता है। यह परंपरा दो दिन चलती है, जिसमें लंका दहन की शोभायात्रा भी शामिल है।
Times of India··Bhilwara



