'अर्ध सत्य': पर्दे पर पुलिस की हिंसा और विरोधाभास
1983 की फिल्म 'अर्ध सत्य', जिसका निर्देशन गोविंद निहलानी ने किया, आज भी परेशान करती है। यह पुलिस की बर्बरता को केवल व्यक्तिगत घटनाओं के रूप में नहीं बल्कि समाज में गहराई से जड़ी हुई समस्या के रूप में दिखाती है। फिल्म पुलिसकर्मियों के विरोधाभासों और कानून व्यवस्था में प्रणालीगत हिंसा की गंभीर समीक्षा करती है।
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